फ़ास्ट फ़ूड के चक्कर में इंडियन लोग भूलते जा रहे हैं यह 9 टेस्टी और पारंपरिक व्यंजन

नमस्कार आप सभी का बहुत बहुत स्वागत है हमारे इस चैनल और ब्लॉग में। आशा करता हूँ आपको ये आर्टिकल आज का बहुत पसंद आएगा और आपका प्यार और सहयोग मुझे जरूर मिलेगा। दोस्तों अपना प्यार और सहयोग बनाये रखने के लिए कृपया आप मेरे आर्टिकल को लाइक करें और साथ ही साथ शेयर जरूर करें अपने सभी दोस्तों के साथ इससे मुझे थोड़ी से मदद मिलेगी और मैं रोज अच्छी जानकारी लाने का प्रयास करूँगा। आशा करता हूँ की आप सब मेरी मदद जरूर करेंगे।


सारी दुनिया ये बात जानती है कि भारत विविधताओं से भरा हुआ एक देश है। भारत के हर राज्य में आपको अलग संस्कृति और अलग तरह का खान-पान देखने को मिल जाएगा। बात अगर खान-पान की करें तो भारतीय खानों की चर्चा दुनियाभर के फूडीज़ के बीच में होती है। ये बात अलग है कि आज के इस आधुनिक युग में फास्ट फूड्स ने काफी हद तक पारंपरिक भारतीय खानों पर असर डाला है, लेकिन आज भी जो लोग ऑथेन्टिक इंडियन फूड को पहचानने की काबिलियत रखते हैं वो जानते हैं कि बाज़ार में जगह-जगह मिलने वाला ये फास्ट-फूड स्वाद और सेहत के मामले में भारतीय खानों के सामने कहीं भी नहीं ठहरते। सामाजिक संरचना के मामले में विश्वभर में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। इन बदलावों का भारत के खानों पर असर ये हुआ है कि आज भारत की ही कुछ पारंपरिक और शानदार डिशों को भारत के लोग भूलते जा रहे हैं। हम ऐसी ही कुछ डिशों का ज़िक्र आज आपसे कर रहे हैं। हमारी तरफ से ये एक प्रयास है भारत की विविधताओं को संरक्षित करने का। आपके सहयोग की भी हम अपेक्षा रखते हैं।


01- फ़ुलकरी पुलाव


पंजाब तो वैसे भी स्वाद और फ्लेवर्स की धरती है। फुलकरी पुलाव पंजाब की इसी ज़ायकेदार खासियत की मिसाल है। चार अलग प्रकार के चावलों से तैयार होने वाला फुलकरी पुलाव अब पंजाब के युवाओं की पहली पसंद नहीं रह गया है। यहां के युवा भी अब फास्ट फूड को ज़्यादा तरजीह देने लगे हैं। केसर और दूसरे भारतीय मसालों से तैयार होने वाला फुलकरी पुलाव एक दौर में पंजाब के हर निवासी की पहली पसंद हुआ करता था।






Third party image reference

02- टिक-कोह


टिक-कोह कभी तमिलनाडु के ज़्यादातर घर की एक लोकप्रिय डिश हुआ करती थी, लेकिन फास्ट फूड के इस दौर में नई पीढ़ी के लोग इसको कम पसंद करने लगे हैं।। ये बेहद लाइट और रिफ्रेशिंग डिश है। इसे नारियल के पानी, फिश सॉस और शहद में तैयार किया जाता है। इसका मुख्य इन्ग्रीडियंट है पोर्क और कैरेमल। इसे लाल मिर्च से गार्निश करके सर्व किया जाता है। ये एक प्रकार ऐपेटाइज़र है।






Third party image reference

03- लहाबी कबाब


कश्मीर, ये नाम सुनकर या पढ़कर ही अब लोगों के चेहरों पर हल्की सी सलवटें उभर आती हैं। आज कश्मीर राजनीति के चुंगल में ऐसा फंसा हुआ है कि कश्मीरियत के वजूद पर ही खतरा पैदा हो गया है। लेकिन एक दौर था जब कश्मीर अपनी खूबसूरत वादियों के अलावा अपने ज़ायकेदार खानों के लिए भी देश और दुनिया के बाकी हिस्सों के लोगों के लिए किसी खूबसूरत सपने जैसा हुआ करता था। सालों से चल रहे संघर्ष ने कश्मीर के लोगों को उनकी असली पहचान से दूर कर दिया है। लहाबी कबाब कश्मीर की एक ऐसी डिश है जिसे जिसने भी चखा, वो उसकी महक और उसके स्वाद का कायल हो गया। बारीक पिसे हुए मटन, अंडे और उबले टमाटरों से तैयार होने वाला लहाबी कबाब कश्मीरी मिर्च का फ्लेवर मिलने के बाद और भी ज़्यादा लजीज़ हो जाता है। सर्दियों के मौसम में इसे चावल के साथ खाने की परंपरा रही है।






Third party image reference

04- कलमी साग


एक दौर था जब गर्मी के मौसम में दोपहर के समय बंगाल के हर घर में कलमी साग ज़रूर खाया जाता था। पोखरों में पैदा होने वाले इस विशेष साग से गर्मियों के मौसम में पेट को काफी ठंडक पहुंचती है। किसी भी दूसरी तरह के साग की तरह ही कलमी साग को भी तैयार किया जाता है। अधिकतकर लोग इसे उबले चावलों के साथ खाना ज़्यादा पसंद करते हैं। तेज़ी से बदलते वक्त में बंगाल में कलमी साग को लोगों ने खाना भी कम कर दिया।






Third party image reference

05- लहसुन की खीर


चौंकिये मत जनाब, लहसुन की खीर होती है और हमारे देश भारत में ही होती है। ये बात अलग है कि अब लोगों ने इसे खाना बेहद कम कर दिया है और देश के ज़्यादातर हिस्सों को तो ये भी नहीं मालूम की लहसुन की भी कोई खीर होती है। लेकिन एक दौर था जब मेवाड़ के राजघराने का ये एक पॉप्युलर डेज़र्ट हुआ करता था। कई लोग इसे बेनामी खीर भी कहा करते थे।






Third party image reference

06- ड्रमस्टिक सूप


ड्रमस्टिक को भारत के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नाम से पुकारा जाता है। इसका सूप एक दौर में त्रावणकोर साम्राज्य में काफी लोकप्रिय हुआ करता था। ड्रमस्टिक सूप बेहद स्वादिष्ट और हेल्दी होता है। इसे बनाने में करी पत्ता का भी इस्तेमाल होता है। हालांकि आज के ज़माने में त्रावणकोर में भी बहुत ही कम लोग इस सूप को पसंद करते हैं।






Third party image reference

07- छैना पोड़ा


गुड़, पनीर और मेवों से तैयार होने वाला छैना पोड़ा एक प्रकार की बेक्ड मिठाई है। ये ओडिसा में काफी लोकप्रिय हुआ करता था। समय के साथ छैना पोड़ा को बनाने के तरीके में काफी बदलाव हुआ। आज छैना पोड़ा बनाने में गुड़ की जगह ब्राउन शुगर का इस्तेमाल किया जाने लगा है। लेकिन आज भी कई ऐसे लोग मौजूद हैं जिन्होंने गु़ड़ से तैयार होने वाले छैना पोड़ा का दौर भी देखा है। उनके मुताबिक, आज के छैना पोड़ा में वो बात नहीं है जो उस ज़माने में गुड़ से बने छैना पोड़ा में हुआ करती थी।






Third party image reference

08- अकतोरी


हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति घाटी के इलाके में त्यौहारों के समय तैयार किया जाता है अकतोरी। ये प्रकार का केक है जो एक खास किस्म की पत्तियां और गेंहू के आटे से तैयार किया जाता है। हालांकि आज इलाके के युवाओं के बीच ये उतना लोकप्रिय नहीं रह गया है, लेकिन एक दौर में ये त्यौहारों का सबसे शानदार स्नैक हुआ करता था।






Third party image reference

09- तुज्जी चिकन


तुज्जी चिकन भी कश्मीर से आने वाली एक शानदार डेलीकेसी है। इसे सीख कबाब की तरह ही पकाया जाता है। इसे कश्मीर के रईस लोगों के घरों की डिश माना जाता है। कश्मीरी लाल मिर्च और सौंफ के पाउडर से तैयार होने वाला तुज्जी चिकन बेहद लजीज़ होता है।


इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें जिससे कि अधिक से अधिक लोगों के पास यह जानकारी बहुत सके और अधिक से अधिक लोगों को यह जानकारी मिल सके ,अगर आप सभी लोगों को यह जानकारी महत्वपूर्ण लगी तो इसे लाइक जरुर करें और अपने विचार नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर दें .


आप सभी लोगों ने अपना कीमती समय निकालकर इस खबर को पढ़ने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद आपका दिन शुभ हो .


(आप सभी से अनुरोध है की ऐसी ही जानकारी के लिए आप मुझे लाइक एवं फॉलो जरूर करें । धन्यवाद)


अगर जानकारी अच्छी लगे तो पोस्ट को लाइक, शेयर और कमेंट करें। ऐसे ही हर रोज जानकारी प्राप्त करने के लिए हमें फॉलो करें।